अभियान चलाकर महिलाओं को एनीमिया के बारे में जागरूक किया जाए: एसडीएम

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अम्बाला, 28 फरवरी:-  
एसडीएम सचिन गुप्ता ने आज अपने कार्यालय में विभिन्न विभागों के अधिकारियों की बैठक लेकर उन्हें निर्देश दिए कि एक जागरूकता अभियान चलाकर महिलाओं को एनीमिया के बारे में जागरूक किया जाए। उन्होंने कहा कि एनीमिया मुक्त भारत को लेकर इसके लिए प्रथम चरण में अम्बाला ब्लॉक 2 के गांवों में एक मार्च से सात मार्च तक ं नेहरू युवा केन्द्र, जिला रैड क्रॉस सोसायटी, स्वास्थ्य व महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जागरूकता कैम्प आयोजित किए जाएगें। उपायुक्त अशोक कुमार शर्मा के मार्गदर्शन एवं निर्देशानुसार यह जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएगें। उन्होंने कहा कि शरीर में खून की कमी होने से कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं खड़ी हो जाती हैं। अगर समय रहते इस ओर ध्यान दिया जाए तो उन समस्याओं से बचा जा सकता हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग भी इस बारे में स्कूलों में कक्षाओं के अन्दर विद्यार्थियों को जानकारी दें और बच्चों को बताए कि शरीर में खून की कमी होने से स्वास्थ्य पर किस प्रकार से प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हैं। एसडीएम ने कहा कि महिलाएं और किशोरियांं जागरूकता के अभाव के कारण एनीमिया की शिकार होती हैं।
बैठक में मौजूद सीएमजीजीए उत्सव शाह ने भी इस जागरूकता अभियान के बारे में अपने सुझाव दिए और कहा कि सभी विभाग मिलकर एक टीम भावना के साथ काम करते हुए इस बारे में लोगों को सही जानकारी देकर जागरूक करने का काम करें। इस अवसर पर सीएमओ कुलदीप सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी बलजीत कौर, जिला रैड क्रॉस सोसायटी सचिव विजय लक्ष्मी, डॉक्टर हितैष शर्मा, डॉ0 सुनीधी करोल, डॉ0 सुनिल हरि सहित अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहें।
उल्लेखनीय है कि शरीर में खून की कमी। हमारे शरीर में हिमोग्लोबिन एक ऐसा तत्व है जो शरीर में खून की मात्रा बताता है। चिकित्सकों के अनुसार पुरुषों में इसकी मात्रा 12 से 16 प्रतिशत तथा महिलाओं में 11 से 14 के बीच होना चाहिए।
एनीमिया तब होता है, जब शरीर के रक्त में लाल कणों या कोशिकाओं के नष्ट होने की दर, उनके निर्माण की दर से अधिक होती है। किशोरावस्था और रजोनिवृत्ति के बीच की आयु में एनीमिया सबसे अधिक होता है। गर्भवती महिलाओं को बढ़ते शिशु के लिए भी रक्त निर्माण करना पड़ता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को एनीमिया होने की संभावना अधिक रहती है। एनीमिया एक गंभीर बीमारी है। इसके कारण महिलाओं को अन्य बीमारियां होने की संभावना और बढ़ जाती है। एनीमिया से पीड़ित महिलाओं की प्रसव के दौरान मरने की संभावना सबसे अधिक होती है।
लक्षण:- त्वचा का सफेद दिखना, जीभ, नाखूनों एवं पलकों के अंदर सफेदी, कमजोरी एवं बहुत अधिक थकावट, चक्कर आना- विशेषकर लेटकर एवं बैठकर उठने में, बेहोश होना, सांस फूलना, हृदयगति का तेज होना, चेहरे एवं पैरों पर सूजन दिखाई देना।
कारण:-सबसे प्रमुख कारण लौह तत्व वाली चीजों का उचित मात्रा में सेवन न करना, मलेरिया के बाद जिससे लाल रक्त करण नष्ट हो जाते हैं। किसी भी कारण रक्त में कमी, जैसे- शरीर से खून निकलना (दुर्घटना, चोट, घाव आदि में अधिक खून बहना), शौच, उल्टी, खांसी के साथ खून का बहना, माहवारी में अधिक मात्रा में खून जाना, पेट के कीड़ों व परजीवियों के कारण खूनी दस्त लगना, पेट के अल्सर से खून जाना, बार-बार गर्भ धारण करना।
उपचार तथा रोकथाम:- अगर एनीमिया मलेरिया या परजीवी कीड़ों के कारण है, तो पहले उनका इलाज करें, लौह तत्वयुक्त चीजों का सेवन करें, विटामिन ए एवं सी युक्त खाद्य पदार्थ खाएं, गर्भवती महिलाओं एवं किशोरी लड़कियों को नियमित रूप से 100 दिन तक लौह तत्व व फॉलिक एसिड की 1 गोली रोज रात को खाना खाने के बाद लेनी चाहिए। जल्दी-जल्दी गर्भधारण से बचना चाहिए। भोजन के बाद चाय के सेवन से बचें, क्योंकि चाय भोजन से मिलने वाले जरूरी पोषक तत्वों को नष्ट करती है, काली चाय एवं कॉफी पीने से बचें, संक्रमण से बचने के लिए स्वच्छ पेयजल ही इस्तेमाल करें, स्वच्छ शौचालय का प्रयोग करें, खाना लोहे की कड़ाही में पकाएं।
फोलिक एसिड:- शरीर में स्वस्थ लाल रक्त कण बनाने के लिए फोलिक एसिड की आवश्यकता होती है। फोलिक एसिड की कमी से एनीमिया की बीमारी होती है।
गहरे हरे रंग की पत्तेदार सब्जियां, मूंगफली, अंडे,  कुकुरमुत्ता (मशरूम), मटर व फलियां, चोकर वाला आटा, आलू, दालें, सूखे मेवे, मछली, मांस, बाजरा, गुड़, गोभी, शलजम, अनानास, अंकुरित दालों व अनाजों का नियमित प्रयोग करें।

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