अम्बाला में ही 1857 क्रांति की शुरुआत सबसे पहले हुई थी

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चंडीगढ़, 3 मार्च- हरियाणा के अम्बाला में ही 1857 क्रांति की शुरुआत सबसे पहले हुई थी, जोकि इतिहास के अनेक दस्तावेजों के माध्यम से प्रमाणित होता है।
हरियाणा के मुख्य सचिव श्री विजय वर्धन की अध्यक्षता में वार मैमोरियल अम्बाला पर  आयोजित एक बैठक में प्रसिद्घ इतिहासकारों ने एक स्वर में यह दावा किया। इस बैठक में  प्रसिद्घ इतिहासकार डॉ. के सी यादव, दिल्ली से महाभारत एवं वैदिक काल इतिहास एवं कल्चर की चेयरमैन नीरा मिश्रा, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सेवानिवृत प्रोफेसर डॉ. अरूण केसरवानी, अम्बाला के इतिहास पर अनुसंधान कर रहे डॉ. उदयवीर, डॉ. जयवीर धनखड़ रोहतक, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक डॉ. महासिंह पुनिया सहित हरियाणा पर कार्य कर रहे अनेक इतिहासकार शामिल हुए।
हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल के मार्गदर्शन में बन रहा शहीदी स्मारक  गृहमंत्री श्री अनिल विज एक पुरानी मांग थी । अम्बाला में राष्टï्रीय राजमार्ग पर 22 एकड़ में बनाए जा रहे शहीदी स्मारक पर करीब 200 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। यह देश में अपनी तरह का पहला स्मारक होगा, जहां 1857 में अम्बाला से शुरू हुई आजादी की लड़ाई से लेकर रंगून में बहादुरशाह जफर की शहादत तक की जानकारी दी जाएगी। स्मारक में शहीदों का इतिहास म्यूजियम और ओपन थिएटर में भी दर्शाया जाएगा, जिसमें 2500 लोगों के बैठने की व्यवस्था रहेगी।बैठक के दौरान सूचना, जनसम्पर्क एवं भाषा विभाग के महानिदेशक डॉ. अमित अग्रवाल ने वार मैमोरियल के विषय में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्मारक में 210 फुट ऊंचे 13 मंजिला मैमोरियल टावर बनाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि टावर के साथ 20 फुट ऊंचाई की दीवार बनाई जायेगी, जिस पर 1857 की क्रांति के योद्धाओं का उल्लेख किया जायेगा। इस स्मारक में विकसित किए जाने वाले 6 पार्कों में 1857 की क्रांति के विवरणों को भी दर्शाया जाएगा। इसके अलावा ओपन एयर थियेटर के पीछे दुकानें, हाल, फूड स्टॉल, प्रदर्शनी स्थल के साथ आईसी बिल्डिंग में वीआईपी लॉज, चिल्ड्रन कॉर्नर, बुक स्टोर, म्यूजियम बिल्डिंग में लिफ्टस की व्यवस्था होगी। इसके साथ ही ऑडिटोरियम में स्थित ओपन थियेटर में लोगों के बैठने की व्यवस्था, अलग-अलग प्रकार के फव्वारे, वाटर कर्टन के साथ दो प्लेटफार्म व अन्य सुविधाएं रहेंगी। इनके अलावा कार पार्किंग और हैलीपैड की व्यवस्था भी रहेगी।
डॉ. उदयवीर ने कहा कि 10 मई 1857 को शुरू हुई आजादी की पहली लड़ाई मेरठ व अन्य प्रदेशों से करीब 9 घंटे पहले ही अम्बाला में शुरू हो चुकी थी। इसका प्रमाण इतिहास में कई स्थानों पर मिलता है। डॉ. जयवीर धनखड़ ने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण विजन है, जोकि भावी पीढिय़ों के लिए अहम भूमिका अदा करेगा। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के डॉ. महासिह पुनिया ने कहा कि स्मारक का निर्माण एक क्रांतिकारी कदम है और इसको हरियाणा की संस्कृति से भी जोडऩे का प्रयास करना चाहिए।
बैठक में वीडियों कांफ्रसिंग से जुड़े डॉ. केसी यादव ने कहा कि यह समारक हरियाणा के शहीदों को सच्ची श्रंद्घाजलि होगी। इससे आने वाली पीढियों को 1857 की क्रांति के विषय में विस्तृत जानकारी प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि ईस्ट इंडिया कम्पनी ने 30 दिसम्बर 1803 से हरियाणा पर अपना अधिकारी जमाया था। इससे स्मारक में लाईट एंड साउंड के माध्यम से आजादी की लड़ाई का सामूहिक विवरण एवं अम्बाला से हुई शुरूआत का चित्रण होगा। इसमें हरियाणा के साथ-साथ झांसी की रानी, तांत्या टोपे, मंगल पांडे इत्यादि वीरों की आजादी की लड़ाई में भूमिका को विस्तार से प्रदर्शित करना सराहनीय कार्य है।
श्रीमती नीरा मिश्रा ने कहा कि 1857  की क्रांति में अम्बाला ने नींव का काम किया। आजादी की लड़ाई में रोटी और कमल के फूल का बहुत बड़ा महत्व रहा है, जिससे क्रांतिकारियों को भावी योजना की जानकारी मिलने में सहायक होता था। डॉ. अरूण केसरवानी ने कहा कि यह मैमोरियल अम्बाला की आत्मा है, जिसमें बनाई जा रही लाइब्रेरी युवाओं की प्रेरणा में एक महत्वपूर्ण कार्य करेगी।

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