जल शक्ति अभियान के दूसरे चरण कैच द रैन :जब भी हो, वहीं बारिश के पानी के संचयन की योजना

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अम्बाला, 3 मार्च :-
केन्द्रीय जलशक्ति राज्य मंत्री रतन लाल कटारिया ने आगामी जल शक्ति अभियान के दूसरे चरण कैच द रैन बारे में प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस अभियान के द्वारा जहां भी हो जब भी हो, वहीं बारिश के पानी के संचयन की योजना है। जल शक्ति अभियान के दूसरे चरण की घोषणा अभी हाल ही में पिछले रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मन की बात कार्यक्रम में की गई थी।
श्री कटारिया ने अपने क्षेत्र में इस अभियान को बढ़ावा देने के लिए अपने संसदीय क्षेत्र के जिलाधिकारी को भी इस संबंध में पत्र लिखा है और साथ ही सरकारी व निजी सभी हितधारकों से अपने-अपने परिसरों में वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए आग्रह किया है। हरियाणा राज्य में तेजी से हो रही भूजल संसाधनों की कमी के विषय पर प्रकाश डाला और जिलाधिकारियों से अपने संबंधित जिलों में इस संवेदनशील मुद्दे पर कार्य करने का आग्रह किया। कुरुक्षेत्र जलशक्ति अभियान के प्रथम चरण में देश के शीर्ष दस प्रदर्शन करने वाले जिलों में से एक रहा है। जलशक्ति अभियान-1 के दौरान जमीनी स्तर से मिली सकारात्मक प्रतिक्रियाओं की सराहना की।
श्री कटारिया ने अपने जलशक्ति मंत्रालय के माध्यम से सभी प्रकार की तकनीकी सहायता मुहैया कराने की पेशकश भी की और उन्होंने जल्द से जल्द इस विषय पर तेजी लाने के लिए कहा। उन्होंने प्रधानमंत्री के भारत को एक जल समृद्ध देश के रूप में बदलने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए अधिकारियों को इस विषय पर सामूहिक प्रयास करने के प्रेरित किया। आगे उन्होंने बताया कि यह तभी संभव हो पाएगा जब जल चेतना खुद को जन चेतना में बदल दे और यह जल संचयन का कार्य एक जन आंदोलन के रूप में परिवर्तित हो जाए। श्री कटारिया ने बताया कि अपने देश भारत में वैश्विक मानव आबादी का 18 प्रतिशत तथा वैश्विक पशुधन आबादी का 15 प्रतिशत हिस्सा वास करता है, जबकि वैश्विक भूमि में भारत की हिस्सेदारी महज 2 प्रतिशत हैं तथा जल संसाधनों के मामले में यह महज 4 प्रतिशत तक ही सिमटी हुई है। भारत में औसतन लगभग 1170 मिमी वर्षा होती है परन्तु इस वर्षा जल के मात्र 10 से 20 प्रतिशत का ही उपयोग होता है। वर्षा जल को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने और भूजल को पुनर्भरण करने के उद्देश्य से जलशक्ति मंत्रालय द्वारा वर्ष 2019 में देश के 256 पानी की कमी से जूझने वाले जिलों में जल शक्ति अभियान शुरू किया गया था।
श्री कटारिया ने जमीनी स्तर पर जल शक्ति अभियान-1 के बेहद सकारात्मक परिणाम सामने आने पर खुशी जाहिर की और बताया कि इस अभियान के तहत केन्द्र सरकार के अधिकारियों की टीम, जिसमें संयुक्त सचिव और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल थे, इन सभी ने क्षेत्र के अधिकारियों के बीच जाकर उन्हें जल के प्रति जागरूक किया और उन्हें जल संचयन व जल संरक्षण निर्माण के लिए प्रोत्साहित किया। जिसके परिणामस्वरूप 1,01,04,338 जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन परियोजनाएं, 75,36,381 पारंपरिक और अन्य जल निकायों का नवीनीकरण, 74,85,025 पुन: उपयोग और पुनर्भरण संरचनाओं तथा 96,96,381 वाटरशेड का विकास किया गया। इस अभियान के अंतर्गत कुल 1,19,85,64,862 पेड़ पौधे भी लगाए गए। जल शक्ति अभियान-1 में लोगों द्वारा बढ़ चढक़र हिस्सा लिया गया। जलशक्ति अभियान-1 के सकारात्मक परिणामों से उत्साहित होकर मंत्रालय ने जलशक्ति अभियान-2 की योजना बनाई है जिसमें देशभर के 734 जिलों, 7195 ब्लॉकों, 2.55 लाख पंचायतए 6.64 लाख गांवों कैच द रेन अर्थात जहां भी गिरे जितना भी गिरे सारे जल के संचयन के लिए कार्य योजन शुरू की गई है।
उन्होंने बताया कि यह अभियान एक अभूतपूर्व स्तर पर कार्य करेगा। इस अभियान में केंद्र सरकार के अधिकारियों की टीमें प्रत्येक जिलों का दौरा करेंगी और उन्हें जल संचयन और संरक्षण के उपाय करने के लिए प्रेरित करेंगी। अभियान को ओर अधिक बढ़ावा देने के लिए नेहरू युवा केंद्र के तहत 1.74 लाख गांव आधारित युवा क्लबों को जमीनी स्तर पर जागरूकता फैलाने के लिए जोड़ा जाएगा। इस प्रायोजन के लिए प्रत्येक जिला स्तर पर कुछ वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाएगी। मंत्रालय इस दिशा में एच्छिक परिणाम प्राप्त करने के लिए रेल मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, परिवहन, नागरिक उड्डयन आदि जैसे सरकार के विभिन्न अन्य मंत्रालयों के बीच अभिसरण को बढ़ावा देने पर भी काम कर रहा है। जलशक्ति अभियान-2 पूरे देश में सभी जल निकायों की जियो टैगिंग की परिकल्पना करेगा तथा यह जल निकायों के कायाकल्प के लिए एक महत्वपूर्ण आधार बनेगा।

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