टैक्स और अनापत्ति प्रमाण-पत्र के लिए अब नहीं लगाने पडेंगे कार्यालयों के चक्कर:मनोहर

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चंडीगढ़, 17 फरवरी – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल के ‘ई-गवर्नेंस से गुड गवर्नेंस’ के लक्ष्य की तरफ एक और ठोस कदम बढ़ाते हुए गृह एवं शहरी स्थानीय निकाय मंत्री श्री अनिल विज ने आज शहरी निकायों के लिए property tax management system claim/objection पोर्टल का शुभारंभ किया।
भ्रष्टाचार पर लगेगी रोक –
इस अवसर पर श्री अनिल विज ने कहा कि इस पोर्टल से मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल का भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और पारदर्शी सेवाएं प्रदान करने का विजन साकार होगा। उन्होंने कहा कि अब शहरों की हर सम्पत्ति की यूनिक आई.डी. होने के कारण गलत रजिस्ट्रियां बंद हो जाएंगी और सम्पत्ति की कैटेगरी व एरिया में आपसी मिलीभगत से होने वाले भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी।
इस पोर्टल की उपयोगिता की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि इस पर प्रदेश के 40 शहरों की सम्पत्तियों का डाटा ऑनलाइन कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि अभी तक ज्यादातर सम्पत्तियों के बारे में न तो नगरीय निकायों को उसके वास्तविक उपयोग का पता होता था और न ही मालिक को पता होता था कि नगर निगम, नगर परिषद या नगर पालिका में उस सम्पत्ति का क्या विवरण दर्ज है, जैसे कितना और कब से टैक्स बकाया है। इसलिए कई बार मनमाने ढंग से टैक्स की डिमांड निकाल दी जाती थी अथवा जब किसी को रजिस्ट्री के लिए अनापत्ति प्रमाण-पत्र की जरूरत पड़ती तो पता चलता था कि उस सम्पत्ति पर टैक्स की बड़ी रकम बकाया है। इसे ठीक करवाने के लिए उन्हें नगरीय निकायों में चक्कर लगाने पड़ते है और काफी परेशान होना पड़ता था। लेकिन इस पोर्टल के माध्यम से ऐसी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा।
सभी शहरों की सम्पत्तियां होंगी ऑनलाइन –
श्री विज ने बताया कि हमारा लक्ष्य सभी शहरों की सम्पत्तियों को ऑनलाइन करना है। इसी उद्देश्य से 88 नगरीय निकायों में सम्पत्ति सर्वे का कार्य पूर्ण होने पर है। प्रदेश के लगभग 39 लाख शहरी परिवारों की सम्पत्तियों का मौके पर सर्वेक्षण पूरा हो चुका है। उन्होंने बताया कि पहले चरण में 40 शहरों की 9 लाख 25 हजार सम्पत्तियों का डाटा ऑनलाइन किया गया है। इसमें जियो टैगिंग के कारण सम्पत्ति का पूर्ण विवरण जैसे मालिक का नाम, पता, क्षेत्रफल, मोबाइल नं., कैटेगरी, आई.डी. नं. आदि के साथ फोटो समेत ऑनलाइन उपलब्ध हैं।
इन शहरों के परिवारों को अब अपने घर-दुकान की रजिस्ट्री के लिए  एन.ओ.सी. या टैक्स सही कराने के लिए नगरीय निकायों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे, बल्कि वे अपने घर के क्षेत्र और श्रेणी के आधार पर देख पायेंगे, क्योंकि उनके घर का फोटो और विवरण अब ऑनलाइन उपलब्ध है।
वे अब एक क्लिक पर न केवल निकटतम लैंड मार्क सहित ड्रोन इमेंजरी पर भू टैग किए गए अपने मकान का फोटो व विवरण देख पायेंगे अपितु भविष्य में हुडा, एचएसआईआईडीसी, बिजली व पानी सहित सभी विभागों के लिए एकल सम्पत्ति आईडी बनने से बिल और कर जमा करना आसान हो जायेगा।
सम्पत्ति का ब्यौरा ऑनलाइन ही ठीक करवाया जा सकेगा –
उन्होंने बताया कि ऑनलाइन उपलब्ध प्रोपर्टी डाटा में अगर कहीं मालिक के नाम, पते, क्षेत्रफल, कैटेगरी संबंधी कोई गलती है तो उसे 30 दिन के अंदर ऑनलाइन ही वेबसाइट www.pmsharyana.com पर संशोधन देकर निशुल्क ठीक करवाया जा सकता है। प्रोपर्टी मालिकों द्वारा दिए गए सुझावों को भी सत्यापन के बाद उनके द्वारा दी गयी सूचना को रिकॉर्ड में सही किया जायेगा। अगले वित्त वर्ष से प्रोपर्टी टैक्स के नोटिस इसी डाटा के आधार पर जारी होंगे।
इस तरह देख सकेंगे अपनी अपने मकान-दुकान की फोटो समेत डिटेल –
करीब 10 लाख प्रोपर्टी नगरीय निकायों के रिकॉर्ड में ही नही थी –
उल्लेखनीय है कि सर्वे के बाद अब नगर निगम, नगर परिषद व नगर पालिकाओं की आय भी बढ़ेगी। क्योंकि प्रदेश के सभी 85 निकाय क्षेत्रों के लगभग 10 लाख सम्पत्तियां ऐसी थीं, जो निकायों के रिकॉर्ड में ही नहीं थी। यानि, सर्वे से पहले वर्ष 2014-15 तक प्रदेश में 29 लाख शहरी सम्पत्तियां ही निकायों के रिकॉर्ड पर थी। अब इनकी संख्या 39 लाख हो गयी है। इससे जहां निकायों को टैक्स के रूप में आमदनी होगी, वहीं इस आमदनी से इन क्षेत्रों के लोगों को भी सफाई, नाली, सीवरेज, ड्रेनेज, सडक़, पार्क, पार्किंग जैसी कई तरह की सुविधाएं भी मिल सकेंगी।
पोर्टल के शुभारंभ अवसर पर, शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री एस.एन. राय, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव डॉ. अमित अग्रवाल, शहरी स्थानीय विभाग के निदेशक अशोक मीणा व अन्य अधिकारी उपस्थित थे।    

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