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अपनी बात :
        इस वर्ष हम अपना 74वां स्वतन्त्रतता दिवस मनाने जा रहे हैं।
15 अगस्त का दिन भारतीय लोकतंत्र और हर भारतीय के लिए काफी खास दिन है।
यही वह दिन है जब भारत को ब्रिटिश शासन से आजादी मिली थी। इसी वजह से हर
साल यह दिवस मनाया जाता है। लेकिन ज्यों ज्यों हम आगे बढ़ रहे हैं वैसे वैसे लोकतंत्र को मजाक के रूप में लिया जाने लगा है। भीड़तंत्र हावी होने लगा है। कानून को ठेंगा दिखाया जाने लगा है। वास्तव में आज की तिथि में जो हालात देश के भीतर चल रहे हैं उसमें भगवान श्री कृष्ण के शास्त्र और अर्जुन के शस्त्रों को उठाए जाने की बहुत आवश्यकता है तभी भारत वापस राम राज्य में परिवर्तित किए जाने की कल्पना को साकार किया जा सकेगा। 
        आज के समय में भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है।  इस दौरान हमने
जहां बहुत सी उपलब्धियां प्राप्त की वहीं कई बातें हमारे लिए नासूर बन
चुकी हैं। जिनका ऑपरेशन किया जाना लोकतंत्र की मजबूती के लिए बहुत जरूरी
है अन्यथा देश के समक्ष समस्याएं लगातार मुंह बाए खड़ी रहेंगी।
        हम जिस संविधान और कानून को मानने की बात करते हैं वही संविधान और कानून
देश के कई लोगों के लिए खिलौना मात्र है। यानि ऐसे लोगों को न तो संविधान
और न ही कानून की पालना करनी है जब परिस्थितियां पूरी तरह से उनके पक्ष
में हैं तो उन्हें सब ठीक लगता है लेकिन यदि कोई फैसला या परिस्थितियां
उनके खिलाफ नजर आती हैं तब वह जहर उगलने लगते हैं। यहां तक कि यह लोग
संसद के साथ-साथ सर्वोच्च न्यायालय के संविधान पीठ द्वारा दिए निर्णय को
भी गलत बताने में संकोच नहीं करते।
        उदाहरणत: सुप्रीमकोर्ट ने मन्दिर के पक्ष में निर्णय दे दिया तो सपा के
सांसद ओवैसी और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड यह कह रहे हैं कि
बाबरी मस्जिद वहीं थी और वहीं रहेगी। तो कोई कहता है कि इसका हाल भी
हदीया सोफिया जैसा ही होगा तो कोई कहता जब हम ताकत बढ़ा लेंगे तो मन्दिर
तोड़ कर मस्जिद बना देंगे।
        ऐसी बातें सुन-सुन कर देश के कानून को सिर माथे लगाने वाला बड़ा वर्ग यह
सोचने पर मजबूर हो रहा है कि क्या ऐसी देश द्रोहिता पूर्ण बातें करने की
कुछ लोगों को छूट मिली हुई है जो न तो संविधान को मानते हैं और न ही संसद
द्वारा पारित कानून और सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय को और हैरानी
की बात तो यह है कि ऐसे लोग दूसरों पर ही संविधान और लोकतंत्र की हत्या
के आरोप लगाते हैं। ऐसे तत्वों के खिलाफ यदि कड़ी कार्यवाही नहीं की
जाती तो ये मौका मिलते ही देश को बर्बाद कर देंगे। मालुम हो कि ये वही
वर्ग है जो संसद द्वारा 370 हटाने के निर्णय को नहीं मानता। ये संसद
द्वारा बने कानून सीएए के खिलाफ दिल्ली और देश के दूसरे हिस्सों में दंगे
तक करवा देता है तो अफजल गुरु और याकूब मेमन को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी
गयी फांसी का भी विरोध करता है। ऐसी गतिविधियों को राजद्रोह और देश द्रोह
के रूप में माना जाना समय की जरूरत है और इनके लिए कड़ी सजा का प्रावधान
करने के लिए कानून में आवश्यक संशोधन किया जाना देश की शांति, सुरक्षा और
अखण्डता के लिए बहुत जरूरी है।
        यह सर्वविदित है कि आज देश को जितनी दिक्कत सीमाओं पर झेलनी पड़ रही है
उससे ज्यादा दिक्कत देश के अंदर पीछे गद्दारों से है। इन गद्दारों को या
देश द्रोहियों को अलग से परिभाषित करने की जरूरत नहीं है। यह अपने
क्रियाकलापों से स्वयं ही सबसे अलग नजर आते  हैं।
        यह अवस्था कोई एक दिन में नहीं बनी बल्कि दशकों से चली आ रही तुष्टिकरण
की नीति का परिणाम है। अन्यथा क्या कारण है कि देश में आज तक एक समान
नागरिक अचार संहिता लागू नहीं हो सकी। वर्ग विशेषों को समय-समय पर दिए गए
विशेषाधिकारों के कारण समाज बंटता नजर आ रहा है। धर्म निरपेक्ष राज्य की
दुहाई देने वाले राजनेता ही इसकी पालना नहीं कर रहे हैं। एक धर्मनिरपेक्ष देश में अल्पसंख्यक आयोग के होने का औचित्य नजर नहीं आता तो ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को चलाए रखने का भी कोई न्यायसंगत उदाहरण नहीं है। अब समय आ गया है कि देश में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू हों। किसी वर्ग विशेष को अलग से किसी प्रकार की कोई छूट न
मिले।
        वोट बैंक के लोभ में बहुसंख्यक समाज को जात-पात में बांटने का काम किया।
यदि सभी नागरिकों पर एक समान लागू होता आया होता तो निश्चित रूप से कोई
बहुसंख्यक या अल्पसंख्यक किसी को भी सर्वोच्च न्यायालय के खिलाफ यूं
बोलने की आजादी न होती।

वहीं दूसरी ओर सीमा पर चीन और पाकिस्तान न तो अपनी आदतें सुधार पा रहे
हैं और न क्षेत्र में शांति रहने दे रहे हैं। चीन की विस्तारवादी नीतियों
ने पूरे विश्व को वर्तमान में तीसरे विश्व युद्ध की तरफ धकेल रखा है।
हैरानी की बात तो यह है कि नेपाल जैसा हिन्दू राष्ट्र भी आज कम्युनिस्ट
प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत को आंखें दिखाने की कोशिश कर रहा है
हालांकि इसका विरोध नेपाल के ही नागरिक कर रहे हैं। पाकिस्तान का तो जन्म
ही हिन्दू विरोध के कारण हुआ था इसी कारण भारत के बहु संख्यक समाज को
निशाना बनाकर प्रहार करने की उसकी जन्म से ही आदत है।                      हालांकि 2014
में केन्द्र ने सत्ता परिवर्तन के साथ ही पाकिस्तान को घुटने टेकने पर
मजबूर होना पड़ रहा है परन्तु फिर भी वह चीन के साथ मिलकर क्षेत्र की
शांति भंग करने का कोई मौका नहीं गंवाता। वह इतना ढीठ कि उसे अपने देश और
जनता की तरक्की की चिन्ता नहीं है बस एक नापाक स्वप्न मन में पाले है कि
किसी तरह हिन्दुस्तान को बर्बाद कर दंू लेकिन उसके यह मंसूबे कभी पूरे
होने वाले नहीं है।                      इसी प्रकार चीन भारत को 1962 का भारत समझने की भूल
किए हुए है लेकिन अब गंगा में बहुत सा पानी बह चुका है। वैसे भी रणनीतिक
रूप से मोदी सरकार ने देश की सेनाओं को इतना मजबूत कर दिया है कि वह किसी
भी परिस्थिति का सामना करने के लिए हरदम तैयार हैं।
        जिस प्रकार से चीन का समर्थन कम्युनिस्ट कर चुके हैं और विपक्ष के कुछ
अन्य नेता गैर जिम्मेदाराना व्यवहार कर रहे हैं उसे देश हित में नहीं कहा
जा सकता।
        हम सभी भारत वासियों को यह बात दृढ़ संकल्प के साथ याद रखनी होगी कि 15
अगस्त, 1947 को जो हमें आजादी मिली, वह आसानी से नहीं मिल गई। इसके लिए
हमें बड़ी कुर्बानी देनी पड़ी है और लंबा संघर्ष करना पड़ा है। आजादी की
लड़ाई में हर धर्म, जाति, रंग और नस्ल के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा
लिया।           आज  जनसंख्या विस्फोट सबसे बड़ी चुनौती है जिसे पार पाना सबसे
ज्यादा जरूरी है। बाकी सभी समस्याओं की धुरी भी किसी न किसी रूप में
जनसंख्या विस्फोट ही है। देश में जनसंख्या रूपी महा मानव में देश में सभी
प्रकार की प्रगति को निगल रहा है इसलिए तुरंत इस देश में एक कड़ा
जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू करना होगा। कम क्षेत्रफल होने के बावजूद
इतनी अधिक आबादी का ही परिणाम है कि उपलब्ध प्राकतिक संसाधन बहुत तेजी से
कम पड़ते जा रहे है तथा सामाजिक, आर्थिक एवं पर्यावरणीय स्थितियां
विस्फोटक होती जा रही हैं। देश ने बहुत प्रगति की परन्तु सारे विकास को
जनसंख्या रुपी दानव निगल रहा है और सुरसा के मुंह की तरह बढ़ रही
जनसंख्या के सामने यह विकास ऊंट के मुंह में जीरे के समान साबित हो रहा
है। हम दो हमारे दो का फार्मूला देश के सभी नागरिकों पर एक समान लागू
किया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस कानून में दंपत्ति को 2 बच्चे
पैदा करने का अधिकार दिया जाए जो दंपत्ति 2 से ज्यादा बच्चे पैदा करती है
उसकी सभी सरकारी सुविधाएं खत्म कर दी जाए और चौथा बच्चा होने पर दंपत्ति
को 10 साल की जेल की जाए। ज्ञापन में कहा गया कि जनसंख्या विस्फोट से
उत्पन्न संसाधन, सामाजिक, आर्थिक एवं पर्यावरण संकट द्वारा राष्ट्र को
संभावित गृहयुद्ध से बचाने हेतु जनसंख्या नियंत्रण कानून बनना जरूरी है।
        आइए हम सब मिलकर अपने प्यारे हिन्दुस्तान को सर्वांगीण विकास खुशहाली,
आतंकवाद, गरीबी मुूक्त बनाने के लिए अपना योगदान दें और सरकार से मांग
करें कि वह सबसे पहले जनसंख्या विस्फोट को कड़े कानून बनाकर काबू करे।
इससे न केवल बेरोजगारी बल्कि किसी हद तक गरीबी भी दूर होगी। सरकार देश
में समान आचार संहित लागू करे। अल्प संख्यक की परिभाषा उसके अधिकार एवं
दायित्वों को स्पष्ट रूप से पुन: निर्धारित करे।
        अम्बाला वाणी की ओर से आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक
शुभकामनाएं। हमारा यह प्यारा गणतंत्र स्वस्थ, सुरक्षित और समृद्ध रहे,
भारत भूमि का मान-सम्मान दुनिया में बढ़ता रहे, भारत पुन: विश्व गुरु
बने, हमारी अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे तेज गति से तरक्की करे, भारतीय
और भारतवंशी दुनिया के जिस भी कोने में रहें नेतृत्वकर्ता की भूमिका
निभाएँ और जीवन से जुड़े हर क्षेत्र में भारत अभूतपूर्व तरक्की करे, ऐसी
हमारी हृदय से कामना है।
        – जितेन्द्र अग्रवाल

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